Prostitute Prevention: वेश्या की बेटी भी वेश्या क्यों बनती है?

वेश्या की बेटी भी वेश्या ही हो जाती है क्यों | Why does the daughter of a prostitute also become a prostitute?

  1. क्योंकि वेश्या की बेटी बचपन से अपनी मां को गलत रास्ते पर चलते हुए देखती है, और वह भी धीरे-धीरे वेश्या बन जाते हैं|
  2. इसका मुख्य कारण उसकी मां है, क्योंकि वह हमेशा गलत तरीकों से पैसे कमाने के लिए सीखी है, अपने जिस्म को बेचकर पैसे कमाई हुई है, और उसको यह काम सबसे आसान लगता है, इसीलिए वह भी चाहती है कि मेरी बेटी भी इसी काम को करें और खूब पैसे कमाए |
  3. अगर वेश्या की बेटी किसी तरह पढ़ – लिख गई भी हो, तो वह भी मेहनत से पैसे कमाने के बजाय, अपनी मां के चले हुए रास्ते पर, गलत तरीकों से पैसे कमाने के लिए सोचती है, क्योंकि वह मेहनत से पीछे हट जाती है |
  4. और उसकी मां भी यही चाहती है कि मेरी बेटी अमीर हो, खूब पैसे वाली हो, ताकि हमें बुढ़ापे में कोई दिक्कत न हो,  मतलब साफ है, खुद भी गलत रास्ते पर चलती है, और अपनी बेटी को भी चलने पर मजबूर कर देती है |
  5. फिर वेश्या की बेटी भी उसी काम को आसान मान लेती है, और पीढ़ी दर पीढ़ी वेश्या की बेटी, वेश्या ही बनती चली जाती है |

वेश्यावृत्ति रोकथाम

  1. वेश्यावृत्ति को  वेश्या ही रोक सकती है |
  2. वह अपने बच्चे को अच्छे संस्कार, अच्छा स्कूल में पढ़ा लिखाकर, मेहनत, इमानदारी  और सच्चाई के रास्ते पर चलना सिखा सकते हैं | और उसे बता सकती है कि मेहनत, ईमानदारी और सच्चाई के रास्ते पर चलकर भी इज्जत के साथ साथ बहुत पैसा भी कमाया जा सकता है | फिर धीरे-धीरे अपने आप वेश्यावृत्ति कम से कम हो जाएगी |

  3. भारतवर्ष में वैवाहिक संबंध के बाहर यौनसंबंध अच्छा नहीं समझा जाता है। वेश्यावृत्ति भी इसके अंतर्गत है। लेकिन दो वयस्कों के यौनसंबंध को, यदि वह जनशिष्टाचार के विपरीत न हो, कानून व्यक्तिगत मानता है, जो दंडनीय नहीं है। “भारतीय दंडविधान” 1860 से “वेश्यावृत्ति उन्मूलन विधेयक” 1956 तक सभी कानून सामान्यतया वेश्यालयों के कार्यव्यापार को संयत एवं नियंत्रित रखने तक ही प्रभावी रहे हैं। वेश्यावृत्ति का उन्मूलन सरल नहीं है, पर ऐसे सभी संभव प्रयास किए जाने चाहिए जिससे इस व्यवसाय को प्रोत्साहन न मिले, समाज की नैतिकता का ह्रास न हो और जनस्वास्थ्य पर रतिज रोगों का दुष्प्रभाव न पड़े। कानून स्त्रीव्यापार में संलग्न अपराधियों को कठोरतम दंड देने में सक्षम हो। यह समस्या समाज की है। समाज समय की गति को पहचाने और अपनी उन मान्यताओं और रूढ़ियों का परित्याग करे, जो वेश्यावृत्ति को प्रोत्साहन प्रदान करती हैं। समाज के अपेक्षित योगदान के अभाव में इस समस्या का समाधान संभव नहीं है।

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